महाभारत 15.2.5
परिदृष्टेषु चाहःसु पुत्राणां श्राद्धकर्मणिददातु राजा सर्वेषां यावदस्य चिकीर्षितम्
paridṛṣṭeṣu cāhaḥsu putrāṇāṃ śrāddhakarmaṇidadātu rājā sarveṣāṃ yāvadasya cikīrṣitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें