महाभारत 15.26.13
भार्या समभवद्यस्य नर्मदा सरितां वरासोऽस्मिन्नरण्ये नृपतिस्तपस्तप्त्वा दिवं गतः
bhāryā samabhavadyasya narmadā saritāṃ varāso'sminnaraṇye nṛpatistapastaptvā divaṃ gataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें