महाभारत 15.26.19
युधिष्ठिरस्य जननी स हि धर्मः सनातनःवयमेतत्प्रपश्यामो नृपते दिव्यचक्षुषा
yudhiṣṭhirasya jananī sa hi dharmaḥ sanātanaḥvayametatprapaśyāmo nṛpate divyacakṣuṣā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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