महाभारत 15.26.3
तेषां कुन्ती महाराज पूजां चक्रे यथाविधिते चापि तुतुषुस्तस्यास्तापसाः परिचर्यया
teṣāṃ kuntī mahārāja pūjāṃ cakre yathāvidhite cāpi tutuṣustasyāstāpasāḥ paricaryayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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