महाभारत 15.26.8
स गत्वा तपसः पारं दीप्तस्य स नराधिपःपुरंदरस्य संस्थानं प्रतिपेदे महामनाः
sa gatvā tapasaḥ pāraṃ dīptasya sa narādhipaḥpuraṃdarasya saṃsthānaṃ pratipede mahāmanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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