महाभारत 15.28.2
तथा पौरजनः सर्वः शोचन्नास्ते जनाधिपम्कुर्वाणाश्च कथास्तत्र ब्राह्मणा नृपतिं प्रति
tathā paurajanaḥ sarvaḥ śocannāste janādhipamkurvāṇāśca kathāstatra brāhmaṇā nṛpatiṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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