महाभारत 15.31.15
सर्वेषां तोयकलशाञ्जगृहुस्ते स्वयं तदापाण्डवा लब्धसंज्ञास्ते मात्रा चाश्वासिताः पुनः
sarveṣāṃ toyakalaśāñjagṛhuste svayaṃ tadāpāṇḍavā labdhasaṃjñāste mātrā cāśvāsitāḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें