महाभारत 15.36.8
तथा तु तेषां सर्वेषां कथाभिर्नृपसंनिधौव्यासमन्वासतां राजन्नाजग्मुर्मुनयोऽपरे
tathā tu teṣāṃ sarveṣāṃ kathābhirnṛpasaṃnidhauvyāsamanvāsatāṃ rājannājagmurmunayo'pare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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