महाभारत 15.37.5
पुत्रशोकसमाविष्टो निःश्वसन्ह्येष भूमिपःन शेते वसतीः सर्वा धृतराष्ट्रो महामुने
putraśokasamāviṣṭo niḥśvasanhyeṣa bhūmipaḥna śete vasatīḥ sarvā dhṛtarāṣṭro mahāmune
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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