महाभारत 15.39.5भवितव्यमवश्यं तत्सुरकार्यमनिन्दितेअवतेरुस्ततः सर्वे देवभागैर्महीतलम्bhavitavyamavaśyaṃ tatsurakāryamaninditeavaterustataḥ sarve devabhāgairmahītalamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें