महाभारत 15.4.6
स्मृत्वा दुर्योधनं शत्रुं कर्णदुःशासनावपिप्रोवाचाथ सुसंरब्धो भीमः स परुषं वचः
smṛtvā duryodhanaṃ śatruṃ karṇaduḥśāsanāvapiprovācātha susaṃrabdho bhīmaḥ sa paruṣaṃ vacaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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