महाभारत 15.43.5
प्रियं मे स्यात्कृतार्थश्च स्यामहं कृतनिश्चयःप्रसादादृषिपुत्रस्य मम कामः समृध्यताम्
priyaṃ me syātkṛtārthaśca syāmahaṃ kṛtaniścayaḥprasādādṛṣiputrasya mama kāmaḥ samṛdhyatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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