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महाभारत 15.44.32
पाञ्चालाः सुभृशं क्षीणाः कन्यामात्रावशेषिताःन तेषां कुलकर्तारं कंचित्पश्याम्यहं शुभे
pāñcālāḥ subhṛśaṃ kṣīṇāḥ kanyāmātrāvaśeṣitāḥna teṣāṃ kulakartāraṃ kaṃcitpaśyāmyahaṃ śubhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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