महाभारत 15.46.6
न तु शोचामि गान्धारीं हतपुत्रां यशस्विनीम्पतिलोकमनुप्राप्तां तथा भर्तृव्रते स्थिताम्
na tu śocāmi gāndhārīṃ hataputrāṃ yaśasvinīmpatilokamanuprāptāṃ tathā bhartṛvrate sthitām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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