महाभारत 15.5.7
विनाशं पश्यमानो हि सर्वराज्ञां गदाग्रजःएतच्छ्रेयः स परमममन्यत जनार्दनः
vināśaṃ paśyamāno hi sarvarājñāṃ gadāgrajaḥetacchreyaḥ sa paramamamanyata janārdanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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