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महाभारत 16.2.19
यश्च नोऽविदितं कुर्यात्पेयं कश्चिन्नरः क्वचित्जीवन्स शूलमारोहेत्स्वयं कृत्वा सबान्धवः
yaśca no'viditaṃ kuryātpeyaṃ kaścinnaraḥ kvacitjīvansa śūlamārohetsvayaṃ kṛtvā sabāndhavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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