महाभारत 16.2.2
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
षट्त्रिंशेऽथ ततो वर्षे वृष्णीनामनयो महान्अन्योन्यं मुसलैस्ते तु निजघ्नुः कालचोदिताः
ṣaṭtriṃśe'tha tato varṣe vṛṣṇīnāmanayo mahānanyonyaṃ musalaiste tu nijaghnuḥ kālacoditāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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