महाभारत 16.3.3उत्पेदिरे महावाता दारुणाश्चा दिने दिनेवृष्ण्यन्धकविनाशाय बहवो रोमहर्षणाःutpedire mahāvātā dāruṇāścā dine dinevṛṣṇyandhakavināśāya bahavo romaharṣaṇāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें