महाभारत 16.4.12
ततः कालपरीतास्ते वृष्ण्यन्धकमहारथाःअपश्यन्नुद्धवं यान्तं तेजसावृत्य रोदसी
tataḥ kālaparītāste vṛṣṇyandhakamahārathāḥapaśyannuddhavaṃ yāntaṃ tejasāvṛtya rodasī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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