महाभारत 16.7.2
तस्याश्रुपरिपूर्णाक्षो व्यूढोरस्को महाभुजःआर्तस्यार्ततरः पार्थः पादौ जग्राह भारत
tasyāśruparipūrṇākṣo vyūḍhorasko mahābhujaḥārtasyārtataraḥ pārthaḥ pādau jagrāha bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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