महाभारत 16.8.31ततः शरीरे रामस्य वासुदेवस्य चोभयोःअन्विष्य दाहयामास पुरुषैराप्तकारिभिःtataḥ śarīre rāmasya vāsudevasya cobhayoḥanviṣya dāhayāmāsa puruṣairāptakāribhiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें