महाभारत 16.8.37
दश षट्च सहस्राणि वासुदेवावरोधनम्पुरस्कृत्य ययुर्वज्रं पौत्रं कृष्णस्य धीमतः
daśa ṣaṭca sahasrāṇi vāsudevāvarodhanampuraskṛtya yayurvajraṃ pautraṃ kṛṣṇasya dhīmataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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