महाभारत 16.8.65ततः स शेषमादाय कलत्रस्य महामतिःहृतभूयिष्ठरत्नस्य कुरुक्षेत्रमवातरत्tataḥ sa śeṣamādāya kalatrasya mahāmatiḥhṛtabhūyiṣṭharatnasya kurukṣetramavātaratइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें