महाभारत 16.8.74
स तत्कृत्वा प्राप्तकालं बाष्पेणापिहितोऽर्जुनःकृष्णद्वैपायनं राजन्ददर्शासीनमाश्रमे
sa tatkṛtvā prāptakālaṃ bāṣpeṇāpihito'rjunaḥkṛṣṇadvaipāyanaṃ rājandadarśāsīnamāśrame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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