महाभारत 16.9.25
व्यास उवाच · vyāsa uvāca
ब्रह्मशापविनिर्दग्धा वृष्ण्यन्धकमहारथाःविनष्टाः कुरुशार्दूल न ताञ्शोचितुमर्हसि
brahmaśāpavinirdagdhā vṛṣṇyandhakamahārathāḥvinaṣṭāḥ kuruśārdūla na tāñśocitumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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