महाभारत 16.9.31
कृतकृत्यांश्च वो मन्ये संसिद्धान्कुरुपुंगवगमनं प्राप्तकालं च तद्धि श्रेयो मतं मम
kṛtakṛtyāṃśca vo manye saṃsiddhānkurupuṃgavagamanaṃ prāptakālaṃ ca taddhi śreyo mataṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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