महाभारत 17.3.25
ततो देवनिकायस्थो नारदः सर्वलोकवित्उवाचोच्चैस्तदा वाक्यं बृहद्वादी बृहत्तपाः
tato devanikāyastho nāradaḥ sarvalokavituvācoccaistadā vākyaṃ bṛhadvādī bṛhattapāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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