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महाभारत 17.3.3
भ्रातरः पतिता मेऽत्र आगच्छेयुर्मया सहन विना भ्रातृभिः स्वर्गमिच्छे गन्तुं सुरेश्वर
bhrātaraḥ patitā me'tra āgaccheyurmayā sahana vinā bhrātṛbhiḥ svargamicche gantuṃ sureśvara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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