महाभारत 18.2.12
किं मे भ्रातृविहीनस्य स्वर्गेण सुरसत्तमाःयत्र ते स मम स्वर्गो नायं स्वर्गो मतो मम
kiṃ me bhrātṛvihīnasya svargeṇa surasattamāḥyatra te sa mama svargo nāyaṃ svargo mato mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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