महाभारत 18.2.16
अग्रतो देवदूतस्तु ययौ राजा च पृष्ठतःपन्थानमशुभं दुर्गं सेवितं पापकर्मभिः
agrato devadūtastu yayau rājā ca pṛṣṭhataḥpanthānamaśubhaṃ durgaṃ sevitaṃ pāpakarmabhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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