महाभारत 18.2.18
दंशोत्थानं सझिल्लीकं मक्षिकामशकावृतम्इतश्चेतश्च कुणपैः समन्तात्परिवारितम्
daṃśotthānaṃ sajhillīkaṃ makṣikāmaśakāvṛtamitaścetaśca kuṇapaiḥ samantātparivāritam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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