महाभारत 18.2.32
भो भो धर्मज राजर्षे पुण्याभिजन पाण्डवअनुग्रहार्थमस्माकं तिष्ठ तावन्मुहूर्तकम्
bho bho dharmaja rājarṣe puṇyābhijana pāṇḍavaanugrahārthamasmākaṃ tiṣṭha tāvanmuhūrtakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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