महाभारत 18.2.40
इत्युक्तास्ते ततः सर्वे समन्तादवभाषिरेकर्णोऽहं भीमसेनोऽहमर्जुनोऽहमिति प्रभो
ityuktāste tataḥ sarve samantādavabhāṣirekarṇo'haṃ bhīmaseno'hamarjuno'hamiti prabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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