महाभारत 18.3.26
एषा देवनदी पुण्या पार्थ त्रैलोक्यपावनीआकाशगङ्गा राजेन्द्र तत्राप्लुत्य गमिष्यसि
eṣā devanadī puṇyā pārtha trailokyapāvanīākāśagaṅgā rājendra tatrāplutya gamiṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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