महाभारत 18.3.39
गङ्गां देवनदीं पुण्यां पावनीमृषिसंस्तुताम्अवगाह्य तु तां राजा तनुं तत्याज मानुषीम्
gaṅgāṃ devanadīṃ puṇyāṃ pāvanīmṛṣisaṃstutāmavagāhya tu tāṃ rājā tanuṃ tatyāja mānuṣīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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