महाभारत 18.5.28
ततो द्विजातीन्सर्वांस्तान्दक्षिणाभिरतोषयत्पूजिताश्चापि ते राज्ञा ततो जग्मुर्यथागतम्
tato dvijātīnsarvāṃstāndakṣiṇābhiratoṣayatpūjitāścāpi te rājñā tato jagmuryathāgatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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