महाभारत 18.5.48हर्षस्थानसहस्राणि भयस्थानशतानि चदिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्harṣasthānasahasrāṇi bhayasthānaśatāni cadivase divase mūḍhamāviśanti na paṇḍitamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें