महाभारत 2.11.25
सावित्री दुर्गतरणी वाणी सप्तविधा तथामेधा धृतिः श्रुतिश्चैव प्रज्ञा बुद्धिर्यशः क्षमा
sāvitrī durgataraṇī vāṇī saptavidhā tathāmedhā dhṛtiḥ śrutiścaiva prajñā buddhiryaśaḥ kṣamā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें