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महाभारत 2.11.31
राक्षसाश्च पिशाचाश्च दानवा गुह्यकास्तथासुपर्णनागपशवः पितामहमुपासते
rākṣasāśca piśācāśca dānavā guhyakāstathāsuparṇanāgapaśavaḥ pitāmahamupāsate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंराक्षसाश्च पिशाचाश्च दानवा गुह्यकास्तथासुपर्णनागपशवः पितामहमुपासते
rākṣasāśca piśācāśca dānavā guhyakāstathāsuparṇanāgapaśavaḥ pitāmahamupāsate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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