महाभारत 2.11.33
यच्च किंचित्त्रिलोकेऽस्मिन्दृश्यते स्थाणुजङ्गमम्सर्वं तस्यां मया दृष्टं तद्विद्धि मनुजाधिप
yacca kiṃcittriloke'smindṛśyate sthāṇujaṅgamamsarvaṃ tasyāṃ mayā dṛṣṭaṃ tadviddhi manujādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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