महाभारत 2.11.40
सर्वतेजोमयी दिव्या ब्रह्मर्षिगणसेविताब्राह्म्या श्रिया दीप्यमाना शुशुभे विगतक्लमा
sarvatejomayī divyā brahmarṣigaṇasevitābrāhmyā śriyā dīpyamānā śuśubhe vigataklamā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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