महाभारत 2.11.46
पितामहसभायां तु कथितास्ते महर्षयःसर्वदेवनिकायाश्च सर्वशास्त्राणि चैव हि
pitāmahasabhāyāṃ tu kathitāste maharṣayaḥsarvadevanikāyāśca sarvaśāstrāṇi caiva hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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