महाभारत 2.12.8
एवं गते ततस्तस्मिन्पितरीवाश्वसञ्जनाःन तस्य विद्यते द्वेष्टा ततोऽस्याजातशत्रुता
evaṃ gate tatastasminpitarīvāśvasañjanāḥna tasya vidyate dveṣṭā tato'syājātaśatrutā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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