महाभारत 2.13.50
पुनर्निवेशनं तस्यां कृतवन्तो वयं नृपतथैव दुर्गसंस्कारं देवैरपि दुरासदम्
punarniveśanaṃ tasyāṃ kṛtavanto vayaṃ nṛpatathaiva durgasaṃskāraṃ devairapi durāsadam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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