महाभारत 2.14.12
निग्राह्यलक्षणं प्राप्तो धर्मार्थनयलक्षणैःबार्हद्रथो जरासंधस्तद्विद्धि भरतर्षभ
nigrāhyalakṣaṇaṃ prāpto dharmārthanayalakṣaṇaiḥbārhadratho jarāsaṃdhastadviddhi bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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