महाभारत 2.15.3
जरासंधबलं प्राप्य दुष्पारं भीमविक्रमम्श्रमो हि वः पराजय्यात्किमु तत्र विचेष्टितम्
jarāsaṃdhabalaṃ prāpya duṣpāraṃ bhīmavikramamśramo hi vaḥ parājayyātkimu tatra viceṣṭitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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