महाभारत 2.16.20विषयेषु निमग्नस्य तस्य यौवनमत्यगात्न च वंशकरः पुत्रस्तस्याजायत कश्चनviṣayeṣu nimagnasya tasya yauvanamatyagātna ca vaṃśakaraḥ putrastasyājāyata kaścanaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें