महाभारत 2.16.22
अथ काक्षीवतः पुत्रं गौतमस्य महात्मनःशुश्राव तपसि श्रान्तमुदारं चण्डकौशिकम्
atha kākṣīvataḥ putraṃ gautamasya mahātmanaḥśuśrāva tapasi śrāntamudāraṃ caṇḍakauśikam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें