महाभारत 2.16.23
यदृच्छयागतं तं तु वृक्षमूलमुपाश्रितम्पत्नीभ्यां सहितो राजा सर्वरत्नैरतोषयत्
yadṛcchayāgataṃ taṃ tu vṛkṣamūlamupāśritampatnībhyāṃ sahito rājā sarvaratnairatoṣayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें