महाभारत 2.16.2
न मृत्योः समयं विद्म रात्रौ वा यदि वा दिवान चापि कंचिदमरमयुद्धेनापि शुश्रुमः
na mṛtyoḥ samayaṃ vidma rātrau vā yadi vā divāna cāpi kaṃcidamaramayuddhenāpi śuśrumaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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